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संन्यास • अध्याय 2 • श्लोक 44
ईहानीहामयैरन्तर्या चिदावलिता मलैः। सा चिन्नोत्पादितुं शक्ता पाशबद्धेव पक्षिणी ॥
जो चित्शक्ति इच्छा एवं अनिच्छा में स्थित है, वह मलों से आच्छादित रहती है तथा पाश से आबद्ध पक्षिणी की भाँति उड़ने में असमर्थ होती है।
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