कला एवं कल्पनाविहीन चित्शक्ति से ही इन विचित्र, स्वच्छ तथा समभाव से सम्पन्न शक्तियों का प्राकट्य हुआ है।
यह चित्शक्ति तीनों कालों में सर्वाधिक शक्तिसम्पन्न तथा दृश्यजगत् के बन्धनों से मुक्त है।
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