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संन्यास • अध्याय 2 • श्लोक 38
मयैव चेतनेनेमे सर्वे घटपटादयः। सूर्यान्ता अवभास्यन्ते दीपेनेवात्मतेजसा ।।
मुझ एक चैतन्य स्वरूप के द्वारा ही घट-पट आदि से लेकर सूर्य पर्यन्त सभी दीपक के सदृश तेजवान् विनिर्मित किये जाते हैं।
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