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संन्यास • अध्याय 2 • श्लोक 29
अवधूतस्त्वनियमः पतिताभिशस्तवर्जनपूर्वकं सर्ववर्णेष्वजगरवृत्त्याहारपरः स्वरूपा-नुसंधानपरः ॥
'अवधूत' नामक संन्यासी किसी भी तरह का नियम नहीं मानता। पतित और निन्दित के अतिरिक्त समस्त जातियों में अजगर वृत्ति से आहार प्राप्त करने वाला होता है। वह अपने स्वरूप की खोज में ही सतत लगा रहता है।
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