परमहंस संन्यासीशिखा और यज्ञोपवीत से विहीन होता है। वह पाँच घरों से हाथरूपी पात्र में भिक्षा ग्रहण करता है।
वह अपने पास केवल एक लंगोटी, एक चादर तथा एक बाँस का दण्ड रखता है। अथवा शरीर पर भस्म धारण करके केवल एक चादर ही अपने पास रखता है और अन्य सभी वस्तुओं का परित्याग कर देता है।
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