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संन्यास • अध्याय 2 • श्लोक 26
हंसो जटाधारी त्रिपुण्ड्रोर्ध्वपुण्ड्रधारी। असंक्लृप्तमाधुकरान्नाशी कौपीनखण्डतुण्डधारी ॥
'हंस' नामक संन्यासी जटाधारी (लम्बे केशों वाला, त्रिपुण्ड्र एवं ऊर्ध्व पुण्डू को धारण करने वाला, अनजान स्थान पर माँगकर भोजन करने वाला तथा कौपीन (लँगोटी) मात्र धारण करने वाला होता है।
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