मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
संन्यास • अध्याय 2 • श्लोक 25
बहूदकः शिखादिकन्धाधरस्विपुण्ड्रधारी। कुटीचकवत्सर्वसमो इ मधुकरवृत्त्याष्टकवलाशी ॥
बहूदक संन्यासी शिखा, कन्था (कचरी) तथा त्रिपुण्ड्र धारण करने वाला होता है। वह सभी प्रकार से कुटीचक की भाँति मधुकरी-वृत्ति (भिक्षा) वाला होता है तथा केवल आठ ग्रास भोजन ग्रहण करता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
संन्यास के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

संन्यास के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें