बहूदक संन्यासीशिखा, कन्था(कचरी) तथा त्रिपुण्ड्र धारण करने वाला होता है। वह सभी प्रकार से कुटीचक की भाँति मधुकरी-वृत्ति(भिक्षा) वाला होता है तथा केवल आठ ग्रास भोजन ग्रहण करता है।
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