मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
संन्यास • अध्याय 2 • श्लोक 24
कुटीचकः शिखायज्ञोपवीती दण्डकमण्डलुधरः कौपीनशाटीकन्धाधरः पितृमातृगुर्वारा-धनपरः पिठरखनित्रशिक्यादिमात्रसाधनपर एकत्रान्नादनपरः श्वेतोर्ध्वपुण्ड्रधारी त्रिदण्डः ॥
कुटीचक संन्यासी शिखा (चोटी) एवं यज्ञोपवीत को अपने शरीर पर धारण किए रहता है। इसके अतिरिक्त वह दण्ड, कमण्डलु, कौपीन (लँगोटी), चादर तथा कन्था (कथरी) धारण करता है। वह माता-पिता तथा गुरु की आराधना करने वाला होता है। वह अपने पास केवल बटलोई, कुदाली और छींका रखता है, एक ही स्थान पर भोजन करता है, मस्तक पर ऊपर की ओर श्वेत त्रिपुण्ड्र धारण करता है तथा त्रिदण्ड भी धारण करता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
संन्यास के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

संन्यास के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें