कुटीचक संन्यासीशिखा(चोटी) एवं यज्ञोपवीत को अपने शरीर पर धारण किए रहता है।
इसके अतिरिक्त वह दण्ड, कमण्डलु, कौपीन(लँगोटी), चादर तथा कन्था(कथरी) धारण करता है। वह माता-पिता तथा गुरु की आराधना करने वाला होता है।
वह अपने पास केवल बटलोई, कुदाली और छींका रखता है, एक ही स्थान पर भोजन करता है, मस्तक पर ऊपर की ओर श्वेत त्रिपुण्ड्र धारण करता है तथा त्रिदण्ड भी धारण करता है।
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