दण्ड और संन्यासी का परस्पर संयोग(सदैव साथ रहना) प्रत्येक स्थिति में आवश्यक माना गया है।
इसलिए बुद्धिमान् यति को दण्ड के बिना तीन बाणों की दूरी(अत्यल्प दूरी) तक भी नहीं जाना चाहिए।
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