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संन्यास • अध्याय 2 • श्लोक 13
दण्डं तु वैणवं सौम्यं सत्वचं समपर्वकम्। पुण्यस्थलसमुत्पन्नं नानाकल्मषशोधितम् ॥
दण्ड वैणव (बाँस से निर्मित), सौम्य (सुन्दर एवं संतुलित), छाल सहित तथा सम पर्वों वाला (जिसकी गाँठें समुचित हों) होना चाहिए। वह पवित्र स्थान में उत्पन्न हुआ हो तथा विविध प्रकार की अशुद्धियों से भली-भाँति शुद्ध किया गया हो।
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