दण्डवैणव(बाँस से निर्मित), सौम्य(सुन्दर एवं संतुलित), छाल सहित तथा सम पर्वों वाला(जिसकी गाँठें समुचित हों) होना चाहिए।
वह पवित्र स्थान में उत्पन्न हुआ हो तथा विविध प्रकार की अशुद्धियों से भली-भाँति शुद्ध किया गया हो।
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