प्रतिगृह्य यतिश्चैतान्यतत्येव न संशयः ।
अद्वैतं नावमाश्रित्य जीवन्मुक्तत्वमाप्नुयात् ॥
उसे तो अद्वैतरूपी नौका में आसीन होकर जीवन-मुक्ति को अवस्था प्राप्त कर लेनी चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
संन्यास के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।