अन्नपानपरो भिक्षुर्वस्त्रादीनां प्रतिग्रही।
आविकं वानाविकं वा तथा पट्टपटानपि ॥
खाने-पीने के पदार्थों की सदा इच्छा रखने वाला तथा वस्त्रों में ऊनी वस्त्र, बिना ऊन के बने वस्त्र, रेशमी वस्त्र आदि को स्वीकार करने वाला संन्यासी निश्चित रूप से अधःपतन को प्राप्त होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
संन्यास के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।