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संन्यास • अध्याय 2 • श्लोक 109
नैवाददीत पाथेयं यतिः किंचिदनापदि। पक्नमापत्सु गृह्णीयाद्यावदन्नं न लभ्यते ॥
आपत्तिकाल के अतिरिक्त संन्यासी को मार्ग के लिए अपने पास कुछ भी संग्रह करके नहीं रखना चाहिए। यदि कुयोगवश अन्न प्राप्त न हो, तो पक्वान्न (पका हुआ अन्न) ग्रहण कर लेना चाहिए।
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