स्थावरं जङ्गमं बीजं तैजसं विषमायुधम्।
षडेतानि न गृह्णीयाद्यतिर्मूत्रपुरीषवत् ॥
स्थावर (जड़), जंगम, बीज, सुवर्ण, विष, आयुध आदि इन छः बस्तुओं को संन्यासी मूत्र एवं विष्ठा के समतुल्य त्याज्य समझ करके कभी ग्रहण न करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
संन्यास के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।