गृहस्थ के धर्म, व्रत, गोत्र आदि के आचरण, पिता तथा माता के कुल की सम्पत्ति आदि संन्यासी के लिए निषिद्ध बताए गए हैं। इन सबका सेवन करने से नीच गति की प्राप्ति होती है।
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