विष, आयुध(शस्त्र), बीज, हिंसा, तीक्ष्णता तथा मैथुन—इन सबका संन्यासयोग के द्वारा परित्याग कर देना चाहिए। इसी प्रकार गृहधर्म आदि सभी व्रतों का भी त्याग कर देना चाहिए।
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