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संन्यास • अध्याय 2 • श्लोक 104
संधिश्च विग्रहो यानं मञ्चकं शुक्लवस्त्रकम्। शुक्रोत्सगों दिवास्वापो भिक्षाधारस्तु तैजसम् ॥
सन्धि विग्रह की बातें, पलङ्ग, सफेद वस्त्र, वीर्य त्याग, दिन में शयन करना, भिक्षा पात्र, स्वर्ण
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