कत्थनं कुत्सनं स्वस्ति ज्योतिश्च क्रयविक्रयम्।
क्रिया कर्मविवादश्च गुरुवाक्य-विलङ्घनम् ॥
खुशामद करना, निन्दा, कुशल, प्रश्र, खरीदने बेचने की बातें, क्रियाकर्म, वाद-विवाद, गुरु के वाक्य का उल्लंघन,
पूरा ग्रंथ पढ़ें
संन्यास के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।