एकान्तवास, मद(अहंकार), मात्सर्य(ईर्ष्या), गन्ध, पुष्प, विभूषण, ताम्बूल, अभ्यञ्जन(तेल-मालिश), क्रीड़ा, भोग की आकांक्षा तथा रसायन(कायाकल्प आदि)—इन सबका संन्यासी को परित्याग करना चाहिए।
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