मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
संन्यास • अध्याय 2 • श्लोक 101
विद्याभ्यासे प्रमादो यः स दिवास्वाप उच्यते। आध्यात्मिक कथां मुक्त्वा भिक्षावार्ता विना तथा। अनुग्रहं परिप्रश्नं वृधाजल्यो ऽन्य उच्यते ॥
इसी कारण विद्या के अभ्यास में प्रमाद करना ही दिन में शयन करना कहा गया है। आध्यात्मिक कथा के अतिरिक्त भिक्षा की बात अथवा अनुग्रह-परिप्रश्न (उत्तर देने) के अतिरिक्त जो भी वार्ता की जाए, उसे व्यर्थ वार्तालाप माना जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
संन्यास के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

संन्यास के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें