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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 5 • श्लोक 8
धीमानस्तित्वशक्तत्वगुणवत्त्वाधिमुक्तितः । तथागतपदप्राप्तिभव्यतामाशु गच्छति ॥
जो बुद्धिमान इन गुणों के अस्तित्व, शक्ति और महानता में श्रद्धा रखता है, वह शीघ्र ही तथागत पद को प्राप्त करने योग्य बन जाता है।
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