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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 5 • श्लोक 7
आश्रये तत्परावृत्तौ तद्गुणेष्वर्थसाधने । चतुर्विधे जिनज्ञानविषयेऽस्मिन् यथोदिते ॥
आश्रय, उसके परिवर्तन, उसके गुण और उनके द्वारा प्राप्त होने वाले फल—इन चार प्रकार से जिनज्ञान का विषय बताया गया है।
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