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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 5 • श्लोक 28
संसारमण्डलक्षान्तिर्बोधिप्राप्तिः समासतः । द्विधा धर्मार्थवादस्य फलमन्त्येन दर्शितम् ॥
अंतिम श्लोक में धर्म के उपदेश का फल संक्षेप में बताया गया है—संसार में धैर्य और अंततः बोधि की प्राप्ति।
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