यतश्च यन्निमित्तं च यथा च यदुदाहृतम् । यन्निष्यन्दफलं श्लोकैश्चतुभिः परिदीपितम् ॥
चार श्लोकों में कारण, निमित्त, उदाहरण और उसके फल का विस्तार से वर्णन किया गया है।
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