अग्नि, विषधर सर्प, हत्यारे या वज्र से उतना भय नहीं होना चाहिए जितना गम्भीर धर्म के अपमान से होना चाहिए; क्योंकि वे केवल जीवन का नाश कर सकते हैं, परन्तु धर्म का अपमान अत्यन्त भयंकर दुर्गति का कारण बन सकता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रत्नगोत्रविभाग के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रत्नगोत्रविभाग के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।