इतीदमाप्तागमयुक्तिसंश्रयादुदाहृतं केवलमात्मशुद्धये । धियाधिमुक्त्या कुशलोपसंपदा समन्विता ये तदनुग्रहाय च ॥
इस प्रकार यह उपदेश प्रमाण, आगम और युक्ति के आधार पर आत्मशुद्धि के लिए कहा गया है, जिससे श्रद्धा और कुशल गुणों से युक्त लोग लाभान्वित हों।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रत्नगोत्रविभाग के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रत्नगोत्रविभाग के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।