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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 4 • श्लोक 92
अयमेषां समासार्थ औपम्यानां क्रमः पुनः । पूर्वकस्योत्तरेणोक्तो वैधर्म्यपरिहारतः ॥
इन सभी उपमाओं का सार और उनका क्रम यहाँ संक्षेप में बताया गया है। प्रत्येक उपमा के बाद अगली उपमा उसके भिन्न अर्थ को स्पष्ट करने के लिए कही गई है।
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