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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 4 • श्लोक 81
दर्शनादेशना व्याप्तिवकृतिर्ज्ञाननिःसृतिः । मनोवाक्कायगुह्यानि प्राप्तिश्च करुणात्मनाम् ॥
बुद्धों की गतिविधियों में दर्शन, उपदेश, सर्वव्यापकता, विविध रूपों का प्रकट होना, ज्ञान का प्रवाह, तथा मन, वाणी और शरीर के गूढ़ कार्य—ये सब करुणामय बुद्धों के लक्षण हैं।
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