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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 4 • श्लोक 80
इत्यर्थं शक्रवैडूर्यप्रतिबिम्बाद्युदाहृतिः । नवधोदाहृता तस्मिन्तत्पिण्डार्थोऽवधार्यते ॥
इन्द्र, वैडूर्य, प्रतिबिंब आदि के नौ उदाहरण देकर इस उपदेश का सार स्पष्ट किया गया है।
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