यथा निम्नोन्नतं व्योम्नि दृश्यते न च तत्तथा । बुद्धेष्वपि तथा सर्वं दृश्यते न च तत्तथा ॥
जैसे आकाश में ऊँच-नीच दिखाई देता है पर वास्तव में ऐसा नहीं होता, वैसे ही बुद्ध में भी अनेक भेद दिखाई देते हैं परन्तु वे वास्तव में नहीं होते।
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