मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 4 • श्लोक 61
धर्मरूपशरीराभ्यां बोधिमण्डाम्बरोदितः । जगत्स्फरति सर्वज्ञदिनकृज्ज्ञानरश्मिभिः ॥
बोधिमण्डल रूपी आकाश में धर्मकाय और रूपकाय से उदित होकर सर्वज्ञ सूर्य अपनी ज्ञान-किरणों से समस्त जगत को प्रकाशित करता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रत्नगोत्रविभाग के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

रत्नगोत्रविभाग के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें