जैसे ब्रह्मा अपने स्थान से विचलित हुए बिना देवताओं को दिखाई देता है, वैसे ही सुगत धर्मकाय से विचलित हुए बिना सभी लोकों में प्रकट होते हैं और प्राणी उन्हें अपने-अपने अनुसार देखते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रत्नगोत्रविभाग के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रत्नगोत्रविभाग के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।