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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 4 • श्लोक 15
प्रासादो वैजयन्तश्च तदन्ये च दिवौकसः । तद्विमानानि चित्राणि ताश्च दिव्या विभूतयः ॥
उसमें देवलोक के महल, वैजयन्त प्रासाद और देवताओं के विविध दिव्य विमानों का भी प्रतिबिंब दिखाई देता है।
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