स्थान-अस्थान, कर्मों के परिणाम, प्राणियों की विभिन्न प्रवृत्तियाँ, क्लेश और उनकी शुद्धि, इन्द्रियों की प्रकृति, पूर्वजन्मों की स्मृति, दिव्य चक्षु और आस्रवों के नाश का ज्ञान—इन सबके द्वारा बुद्ध का बल अज्ञान के कवच, किले और वृक्षों को काटने वाले वज्र के समान अजेय होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रत्नगोत्रविभाग के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रत्नगोत्रविभाग के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।