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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 3 • श्लोक 6
ध्यानादिक्लेशवैमल्ये निवासानुस्मृतावपि । दिव्ये चक्षुषि शान्तौ च ज्ञानं दशविधं बलम् ॥
ध्यान आदि से क्लेशों की शुद्धि, पूर्वजन्मों की स्मृति, दिव्य चक्षु, तथा पूर्ण शान्ति—इन सबके ज्ञान को मिलाकर दश प्रकार के बुद्धबल कहे जाते हैं।
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