शुद्धता की विभिन्न अवस्थाओं के अनुसार संसार में या जिनमंडल में बुद्ध का दर्शन दो प्रकार से होता है—जैसे जल या आकाश में चन्द्रमा का प्रतिबिम्ब दिखाई देता है।
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