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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 3 • श्लोक 36
सर्वलोकोपजीव्यत्वाद्भूम्यम्ब्वग्न्यनिलोपमाः । लौक्चलोकोत्तरातीतलक्षणत्वान्नभोनिभाः ॥
सभी लोकों के लिए उपयोगी होने के कारण बुद्ध के गुण पृथ्वी, जल, अग्नि और वायु के समान हैं; और लौकिक तथा अलौकिक दोनों से परे होने के कारण वे आकाश के समान हैं।
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