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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 3 • श्लोक 28
निर्वेधिकत्वनिदैन्यनिष्कैवल्यनिरीहतः । वज्रसिंहाम्बरस्वच्छदकचन्द्रनिदर्शनम् ॥
इन गुणों की तुलना वज्र, सिंह, आकाश, जल और चन्द्रमा आदि से की जाती है—क्योंकि वे अज्ञान को भेदने वाले, निर्भय, निर्मल, शांत और उज्ज्वल होते हैं।
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