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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 3 • श्लोक 26
संबुद्धमण्डलतलेषु विभोर्विभूतिं तद्वज्जिनात्मजगणा व्यवलोकयन्ति ॥
सम्बुद्ध के मंडल में स्थित शिष्यगण (बुद्धपुत्र) उसी प्रकार बुद्ध की महिमा और विभूति को देखते हैं।
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