मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 3 • श्लोक 25
नारायणस्थामदृढात्मभावः समन्तभद्रोऽप्रतिमो मुनिः । द्वात्रिंशदेतान्यमितद्युतीनि नरेन्द्रचिह्नानि वदन्ति शास्तुः ॥
उनका शरीर नारायण के समान दृढ़ और बलशाली होता है; वे सर्वत्र मंगलकारी और अतुलनीय मुनि होते हैं। इन बत्तीस तेजस्वी लक्षणों को शास्त्रों में बुद्ध के नरेन्द्र-चिह्न (महापुरुष के लक्षण) कहा गया है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रत्नगोत्रविभाग के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

रत्नगोत्रविभाग के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें