उनके शरीर के प्रत्येक रोम अलग-अलग, कोमल और दक्षिणावर्त (दाएँ घूमे हुए) होते हैं; उनके केश महेन्द्रनील रत्न के समान निर्मल होते हैं; और उनका शरीर पूर्ण विकसित न्यग्रोध (बरगद) वृक्ष के समान विशाल और सम होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रत्नगोत्रविभाग के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रत्नगोत्रविभाग के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।