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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 3 • श्लोक 17
सुप्रतिष्ठितचक्राङ्कव्यायतोत्सङ्गपादता । दीर्घाङ्गुलिकता जालपाणिपादावनद्धता ॥
बुद्ध के चरणों में चक्रचिह्न सुस्थिर होता है; उनके पैर सम और सुडौल होते हैं; उनकी उँगलियाँ लम्बी होती हैं; और हाथ-पैरों में जाल के समान रेखाएँ होती हैं।
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