बुद्ध के तीनों प्रकार के कर्म (काय, वाणी, चित्त) सर्वज्ञान से प्रेरित होकर कार्य करते हैं। तीनों कालों में उनका विशाल ज्ञान सतत प्रवाहित रहता है। इसी जिनत्व (बुद्धत्व) से, महान करुणा से युक्त होकर, बुद्धों ने संसार में भय को दूर करने वाला महान सद्धर्मचक्र प्रवर्तित किया।
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