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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 3 • श्लोक 13
ज्ञानपूर्वगमं कर्म त्र्यध्वज्ञानमनावृतम् । इत्येतेऽष्टादशान्ये च गुरोरावेणिका गुणाः ॥
उनके सभी कर्म ज्ञान से पूर्व प्रेरित होते हैं; और उनका ज्ञान तीनों कालों (भूत, वर्तमान, भविष्य) में अवरोध रहित होता है। ये तथा अन्य मिलाकर गुरु (बुद्ध) के अठारह अवेणिक गुण हैं।
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