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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 2 • श्लोक 9
मुनिवृषमधुसारहेमरत्न-प्रवरनिधानमहाफलद्रुमाभम्‌। सुगतविमलरत्लविग्रहाग्र-क्षितिपतिकाञ्चनक्रिम्बवच्चिनत्वम्‌॥
मुनि, वृष, मधु, अन्न, सुवर्ण, निधान, फलयुक्त वृक्ष, सुगत विमल रत्न विग्रह, राजा, काञ्चन बिम्ब के तरह ही जिनत्व है।
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