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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 2 • श्लोक 8
हृद इव विमलाम्बुः फुल्लपद्मक्रमाढ्चयः सकल इव शशाङ्को राहुवक्त्राद्विमुक्तः। रविरिव जलदादिक्लेशनिर्मुक्तरश्मिविंमलगुणयुतत्वाद्भाति मुक्तं तदेव॥
स्वच्छ जलयुक्त एवं प्रफुल्लित पद्म से ढके हुए सरोवर के तरह, राहु के मुख निकला हुआ पूर्ण चन्द्र के तरह, मेघ, धूल आदि क्लेश निर्मुक्त सूर्य के तरह विशिष्ट शुद्ध गुणों से भरा हुआ मुक्त व्यक्ति होता है।
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