पूर्वग्रहान्निवर्त्यैतान् प्रज्ञोपायपरिग्रहात् । परिपाच्योत्तमे याने व्याकरोत्यग्रबोधये ॥
उनके पूर्वग्रहों को दूर करके, प्रज्ञा और उपाय के सहारे उन्हें परिपक्व बनाकर उत्तम यान (महायान) में स्थापित किया जाता है और अंततः श्रेष्ठ बोधि (सम्यक् बुद्धत्व) के लिए उनका व्याकरण (भविष्यवाणी) किया जाता है।
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