जो साधक शान्ति के मार्ग में प्रविष्ट होकर निर्वाण को प्राप्त मान लेते हैं, उन्हें सद्धर्मपुण्डरीक आदि धर्मों के तत्त्व का प्रकाश करके आगे का सत्य प्रकट किया जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रत्नगोत्रविभाग के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रत्नगोत्रविभाग के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।