मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 2 • श्लोक 56
संबोधिं धर्मचक्रं च निर्वाणाधिगमक्रियाम् । क्षेत्रेष्वपरिशुद्धेषु दर्शयत्याभवस्थितेः ॥
बुद्ध, जो अभी संसार में स्थित हैं, वे अशुद्ध क्षेत्रों (अपरिपक्व जीवों की अवस्था) में सम्बोधि (पूर्ण ज्ञान), धर्मचक्र-प्रवर्तन तथा निर्वाण की प्राप्ति की क्रिया का प्रदर्शन करते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रत्नगोत्रविभाग के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

रत्नगोत्रविभाग के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें