जातकान्युपपत्तिं च तुषितेषु च्युतिं ततः। गर्भावक्रमणं जन्म शिल्यस्थानानि कौशलम्॥
(बुद्ध) के जातक, विभिन्न लोकों में उत्पत्ति, तुषित लोक से अवतरण, गर्भ में प्रवेश, जन्म, शिल्प तथा कलाओं में निपुणता — (ये सब उनके प्रकट होने के रूप हैं)।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रत्नगोत्रविभाग के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रत्नगोत्रविभाग के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।