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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 2 • श्लोक 54
जातकान्युपपत्तिं च तुषितेषु च्युतिं ततः। गर्भावक्रमणं जन्म शिल्यस्थानानि कौशलम्‌॥
(बुद्ध) के जातक, विभिन्न लोकों में उत्पत्ति, तुषित लोक से अवतरण, गर्भ में प्रवेश, जन्म, शिल्प तथा कलाओं में निपुणता — (ये सब उनके प्रकट होने के रूप हैं)।
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